Friday, September 18, 2015

समय शास्त्र का नियम प्रेयसी गजब निराला, प्रेम युद्ध यश अपयश में बस दर्शक रहना! सदी दर्द की मेरी तेरा क्षण भर ही थी, बीत गई, अब निर्णय होगा, मुझे पता है। मैं तेरी मुस्कान पे मोहित कभी नहीं था, पर आंखों का नीर चीर मैं नहीं सका क्यों? आज डुबो कर हाथ छुड़ाया तूने मुझसे, कल कोई फिर से डूबेगा,मुझे पता है

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